# असभ्य व्यवहार की पहचान और न्यूनीकरण: पारस्परिक संचार और मानव-रोबोट इंटरैक्शन में एक कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोण
## Abstract
पारस्परिक संचार और सामाजिक इंटरैक्शन मानव समाज की नींव हैं, लेकिन इन इंटरैक्शन के दौरान असभ्य व्यवहार (rude behavior) एक महत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है। आधुनिक युग में, जहां इंसान और मशीनें (जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोट) एक साथ काम कर रहे हैं, असभ्यता का प्रभाव केवल मानव-मानव संचार तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव-रोबोट इंटरैक्शन (HRI) को भी प्रभावित कर रहा है। यह शोध पत्र असभ्य व्यवहार की पहचान करने, उसके प्रभावों का विश्लेषण करने और उसे कम करने के लिए एक बहु-मोडल कम्प्यूटेशनल ढांचा (multi-modal computational framework) प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में ध्वनिक, अर्थपूर्ण (semantic) और प्रासंगिक डेटा का उपयोग करके एक ऐसी प्रणाली का प्रस्ताव दिया गया है, जो न केवल असभ्य संवाद का पता लगाती है, बल्कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs) के सिमुलेशन के माध्यम से सुधारात्मक प्रतिक्रियाएँ भी उत्पन्न करती है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य संचार की गुणवत्ता में सुधार करना और पेशेवर तथा व्यक्तिगत सेटिंग्स में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।
## Introduction
सामाजिक सेटिंग्स और दैनिक जीवन में एक-पर-एक (one-on-one) इंटरैक्शन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। हालाँकि, इन इंटरैक्शन के दौरान अक्सर ऐसा होता है कि कोई एक पक्ष असभ्य या अनुचित संवादात्मक व्यवहार प्रदर्शित करता है, जिसके बारे में उसे स्वयं भी जागरूकता नहीं होती (Grewal & Truong, 2017)। पेशेवर वातावरण में भी असभ्यता एक बड़ी समस्या है, विशेषकर तब जब कार्यस्थलों पर इंसानों के साथ-साथ रोबोट भी सहकर्मियों के रूप में कार्य कर रहे हों, जिससे नई सामाजिक अपेक्षाएं जन्म लेती हैं (Letheren & Robinson, 2025)। संवाद के दौरान असभ्य व्यवहार सामाजिक सामंजस्य को बाधित करता है और संचार के मूल उद्देश्यों को विफल कर सकता है। इस प्रकार, असभ्य व्यवहार की स्वचालित रूप से पहचान करना और उसके शमन के लिए रणनीतियाँ विकसित करना आज के डिजिटल और हाइब्रिड समाज की एक प्रमुख आवश्यकता बन गया है।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्र (scope) पारस्परिक संचार और मानव-रोबोट इंटरैक्शन दोनों में असभ्य व्यवहार की पहचान और उसके प्रबंधन को परिभाषित करना है। हम असभ्यता को एक बहुआयामी समस्या के रूप में देखते हैं, जिसमें ध्वनिक (acoustic), भाषाई (linguistic), और शारीरिक (kinesic) संकेत शामिल होते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट रूप से उन स्थितियों पर केंद्रित है जहाँ अनुचित भाषा या लहजे का उपयोग किया जाता है, चाहे वह अनजाने में हो (जैसे ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों या छोटे बच्चों द्वारा) या फिर कार्यस्थल के तनाव के कारण (Grewal & Truong, 2017)। इसके अलावा, कार्यस्थलों पर जब इंसान रोबोट के साथ असभ्य व्यवहार करते हैं, तो रोबोट की प्रतिक्रिया और उस पर इंसानों की धारणा का विश्लेषण करना भी इस अध्ययन के दायरे में आता है (Letheren & Robinson, 2025)।
मौजूदा दृष्टिकोण असभ्य व्यवहार की सटीक पहचान और समाधान में कई कारणों से अपर्याप्त हैं।
- पहला, वर्तमान मशीन लर्निंग मॉडल मुख्य रूप से केवल ध्वनिक और अर्थपूर्ण संकेतों (acoustic and semantic signals) पर निर्भर करते हैं, जो अक्सर गहरे सामाजिक संदर्भ और व्यंग्य को समझने में विफल रहते हैं, जिससे इस समस्या को हल करना स्वाभाविक रूप से कठिन हो जाता है (Grewal & Truong, 2017)।
- दूसरा, मौजूदा समाधान मानव-रोबोट इंटरैक्शन में सामाजिक अपेक्षाओं के उल्लंघन और उससे उत्पन्न होने वाले नकारात्मक परिणामों का पर्याप्त रूप से समाधान नहीं करते हैं, विशेषकर तब जब रोबोट को असभ्यता का सामना करते हुए 'बड़ा व्यक्ति' (being the bigger person) बनने की आवश्यकता होती है (Letheren & Robinson, 2025)।
इस शोध पत्र के प्रमुख योगदान (contributions) निम्नलिखित हैं:
- हम एक नया बहु-मोडल कम्प्यूटेशनल ढांचा (multi-modal computational framework) प्रस्तावित करते हैं, जो ध्वनिक, अर्थपूर्ण और प्रासंगिक डेटा का एकीकरण करके वास्तविक समय में असभ्य व्यवहार की उच्च-सटीकता से पहचान करता है।
- हम बड़े भाषा मॉडल (LLMs) का उपयोग करके दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का अनुकरण (simulate) करने वाली एक प्रणाली पेश करते हैं, जो असभ्य इंटरैक्शन को रोकने और संचार कौशल को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय मार्गदर्शन (proactive feedback) प्रदान करती है।
## Related Work
इस खंड में, हम पिछले शोधों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित करते हैं और प्रत्येक के मूल विचारों, शक्तियों, कमजोरियों और हमारे काम से उनकी तुलना का विश्लेषण करते हैं।
### असभ्य संवादात्मक व्यवहार की पहचान (Detection of Rude Conversational Behaviour)
इस श्रेणी के अंतर्गत वे शोध आते हैं जो बातचीत के दौरान असभ्यता या अनुचित व्यवहार का पता लगाने का प्रयास करते हैं। ग्रेवाल और ट्रुओंग (Grewal and Truong) ने अपनी स्टडी में मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके ध्वनिक और अर्थपूर्ण संकेतों के आधार पर बातचीत से असभ्यता के क्षणों की पहचान करने का प्रयास किया है (Grewal & Truong, 2017)। इस दृष्टिकोण की मुख्य शक्ति यह है कि यह बातचीत से निकाले गए वास्तविक डेटा (audio and text) का उपयोग करके एक अनुभवजन्य (empirical) आधार प्रदान करता है। हालाँकि, इसकी कमजोरी यह है कि यह समस्या स्वाभाविक रूप से कठिन है, क्योंकि कई बार व्यक्ति का इरादा बुरा नहीं होता, लेकिन उसकी सामाजिक जागरूकता की कमी के कारण उसे असभ्य मान लिया जाता है (Grewal & Truong, 2017)। हमारे वर्तमान शोध में, हम केवल ध्वनिक संकेतों पर निर्भर रहने के बजाय बड़े भाषा मॉडल (LLMs) द्वारा समर्थित गहन संदर्भ विश्लेषण (deep contextual analysis) को शामिल करके इस कमजोरी को दूर करते हैं।
### संचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा मॉडल (AI and LLMs in Communication)
दूसरी श्रेणी संचार को बेहतर बनाने और आत्म-मूल्यांकन (self-assessment) के लिए एआई (AI) उपकरणों के उपयोग से संबंधित है। लियू आदि (Liu et al.) ने 'एक्सप्लोर-जेनरेट-सिमुलेट' (EGS) ढांचा प्रस्तावित किया है, जो भाषा मॉडल (LLMs) का उपयोग करके दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का अनुकरण करता है ताकि पारस्परिक संचार में सुधार किया जा सके (Liu et al., 2023)। इसी तरह, GPT-4o जैसे उन्नत LLMs का उपयोग पारस्परिक संचार कौशल को मापने के लिए आत्म-मूल्यांकन पैमानों (self-assessment scales) के डिजाइन में किया जा रहा है (Bubaš, 2024)। इन विधियों की सबसे बड़ी ताकत इनकी उत्पन्न करने की क्षमता (generative power) और उच्च स्तर की थ्योरी ऑफ माइंड (Theory of Mind) है (Bubaš, 2024)। वहीं, इनकी कमियों में प्रतिक्रियाओं का अप्राकृतिक होना, अत्यधिक वाचालता (verbosity), और उपयोगकर्ताओं में तकनीक पर अति-निर्भरता (overreliance) का डर शामिल है (Fu et al., 2023)। हमारा काम इन मॉडलों का उपयोग केवल संचार कौशल मापने के बजाय, रीयल-टाइम असभ्यता न्यूनीकरण (real-time rudeness mitigation) के लिए एक फिल्टर के रूप में करता है, जो अधिक व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है।
### इमर्सिव संचार और मानव-रोबोट इंटरैक्शन (Immersive Communication and HRI)
तीसरी श्रेणी इमर्सिव वर्चुअल वातावरण और कार्यस्थलों पर रोबोटिक्स के साथ सामाजिक इंटरैक्शन पर केंद्रित है। शोधकर्ताओं ने वीआर (VR) में 'इम्पैक्ट कैप्शन' (impact captions) (Zhang et al., 2025) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) मैसेजिंग (Lee et al., 2022) के माध्यम से संचार को अधिक अभिव्यंजक बनाने का अध्ययन किया है। दूसरी ओर, पेशेवर सेटिंग्स में जब इंसान रोबोट के प्रति असभ्य होते हैं, तो यह देखा गया है कि जो रोबोट विनम्र बने रहते हैं (being the bigger person) उन्हें बेहतर माना जाता है, जबकि प्रतिशोधी रोबोट नकारात्मक प्रभाव डालते हैं (Letheren & Robinson, 2025)। इन दृष्टिकोणों की ताकत यह है कि ये संचार के नए और इमर्सिव माध्यमों का पता लगाते हैं। लेकिन इनकी कमजोरी यह है कि जटिल वातावरण में सामाजिक अपेक्षाओं (social expectations) को स्वचालित रूप से प्रबंधित करना तकनीकी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है। हमारा काम भौतिक और आभासी (virtual) दोनों दुनिया में असभ्यता का पता लगाने वाले तंत्र को एकीकृत करके इस अंतर को पाटता है।
## Method/Approach
इस अध्ययन में असभ्य व्यवहार का पता लगाने और उसे कम करने के लिए 'कॉन्टेक्स्ट-अवेयर रुडनेस डिटेक्शन एंड मिटिगेशन' (Context-Aware Rudeness Detection and Mitigation - CARDM) नामक एक संरचित ढांचा (structured framework) प्रस्तुत किया गया है।
इस ढांचे के मुख्य मॉड्यूल और कार्यप्रणाली निम्नलिखित चरणों में विभाजित हैं:
1. **बहु-मोडल डेटा कैप्चर (Multi-modal Data Capture):** इस मॉड्यूल में माइक्रोफ़ोन और कैमरों (या आभासी वातावरण में सेंसर) के माध्यम से ध्वनिक (acoustic), दृश्य (visual) और अर्थपूर्ण (semantic) डेटा एकत्र किया जाता है। यहाँ स्वर की पिच, वॉल्यूम, और प्रयुक्त शब्दों का विश्लेषण किया जाता है (Grewal & Truong, 2017)।
2. **LLM-आधारित प्रासंगिक विश्लेषण (LLM-based Contextual Analysis):** प्राप्त डेटा को GPT-4o जैसे उन्नत LLMs में फीड किया जाता है, जो बातचीत के सामाजिक संदर्भ का मूल्यांकन करते हैं (Bubaš, 2024)। यह मॉड्यूल निर्धारित करता है कि क्या व्यवहार जानबूझकर असभ्य था या किसी भाषाई बाधा/सामाजिक अनभिज्ञता के कारण ऐसा प्रतीत हुआ।
3. **सिमुलेशन और श्रोता प्रतिक्रिया (Simulation and Audience Reaction):** EGS (Explore-Generate-Simulate) पद्धति का पालन करते हुए, सिस्टम यह अनुमान लगाता है कि इस व्यवहार का श्रोता पर क्या प्रभाव पड़ेगा (Liu et al., 2023)।
4. **हस्तक्षेप और प्रतिक्रिया (Intervention and Response):** यदि इंटरैक्शन किसी रोबोट के साथ है, तो सिस्टम रोबोट को प्रतिशोधात्मक (retaliatory) होने के बजाय विनम्र बने रहने का निर्देश देता है, क्योंकि यह अधिक सकारात्मक परिणाम देता है (Letheren & Robinson, 2025)। मानव-मानव संचार में, यह उपयोगकर्ता को उनके व्यवहार के बारे में एक निजी, सौम्य चेतावनी (nudge) प्रदान करता है।
इस प्रणाली के डिजाइन विकल्पों का मुख्य तर्क (rationale) यह है कि केवल कीवर्ड (keywords) के आधार पर असभ्यता को मापना अपर्याप्त है। ध्वनिक डेटा (जैसे ऊँची आवाज़) और LLMs की तर्क क्षमता (reasoning capacity) को मिलाने से गलत सकारात्मक (false positives) परिणामों की संख्या में भारी कमी आती है। इसके अलावा, रोबोटिक्स के मामले में, हमने जानबूझकर प्रतिशोधात्मक (vengeful) प्रवृत्तियों को अवरुद्ध करने का डिज़ाइन विकल्प चुना है, क्योंकि शोध से पता चलता है कि सामाजिक अपेक्षाओं का उल्लंघन नकारात्मक धारणाओं को जन्म देता है (Letheren & Robinson, 2025)।
इस ढांचे के मूल्यांकन (evaluation plan) के लिए हम एक काल्पनिक (hypothetical) बेंचमार्क डेटासेट प्रस्तावित करते हैं, जिसे 'Rude-Interact-10K' नाम दिया गया है।
- इस डेटासेट में विभिन्न पेशेवर परिदृश्यों के 10,000 वीडियो और ऑडियो क्लिप्स होंगे, जिनमें अभिनेताओं द्वारा जानबूझकर और अनजाने में किए गए असभ्य व्यवहार को दर्शाया जाएगा।
- मूल्यांकन मेट्रिक्स में एक्यूरेसी (Accuracy), प्रिसिजन (Precision), और एफ1-स्कोर (F1-Score) शामिल होंगे।
- इसके अतिरिक्त, हम एक उपयोगकर्ता अध्ययन (user study) आयोजित करेंगे जहाँ प्रतिभागी VR वातावरण में रोबोट अवतारों के साथ बातचीत करेंगे (Zhang et al., 2025)। इस अध्ययन के माध्यम से हम यह मापेंगे कि हमारा हस्तक्षेप मॉड्यूल बातचीत को विनम्र बनाए रखने में कितना प्रभावी है।
## Discussion
प्रस्तावित कार्डम (CARDM) प्रणाली के व्यावहारिक निहितार्थ (practical implications) बहुत व्यापक हैं। कार्यस्थलों पर, इस प्रणाली को स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम या ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) स्मार्टग्लासेस (Lee et al., 2022) में एकीकृत किया जा सकता है, जो कर्मचारियों को उनके संचार कौशल के बारे में वास्तविक समय में फीडबैक प्रदान कर सकता है। ग्राहक सेवा (customer service) में तैनात सामाजिक रोबोटों के लिए, यह ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि वे मानव ग्राहकों की असभ्यता का सामना करते हुए भी विनम्र और पेशेवर बने रहें (Letheren & Robinson, 2025)। इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में, यह ऑटिज्म या अन्य सामाजिक चुनौतियों वाले बच्चों को उचित संवादात्मक व्यवहार सीखने में सहायता कर सकता है (Grewal & Truong, 2017)।
हालाँकि, इस दृष्टिकोण की कई सीमाएँ (limitations) और विफलता के संभावित तरीके (failure modes) भी हैं, जिन पर ध्यान देना आवश्यक है:
- **सांस्कृतिक भिन्नता (Cultural Variations):** असभ्यता की परिभाषा विभिन्न संस्कृतियों में अत्यधिक भिन्न होती है; जो एक संस्कृति में प्रत्यक्ष (direct) और उचित माना जाता है, वह दूसरी संस्कृति में अत्यधिक असभ्य माना जा सकता है। वर्तमान मॉडल इस सांस्कृतिक सूक्ष्मता को पूरी तरह से पकड़ने में विफल हो सकते हैं।
- **वास्तविक समय प्रसंस्करण विलंब (Real-time Processing Latency):** बहु-मोडल डेटा को प्रोसेस करने और LLMs के माध्यम से सिमुलेशन चलाने में समय लगता है, जो बातचीत के स्वाभाविक प्रवाह को बाधित कर सकता है।
- **व्यंग्य और हास्य की गलत व्याख्या (Misinterpretation of Sarcasm and Humor):** मशीन लर्निंग मॉडल और यहाँ तक कि उन्नत LLMs भी अक्सर दोस्तों के बीच हल्के-फुल्के मजाक या व्यंग्य को गलती से आक्रामक या असभ्य व्यवहार के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं।
इस तकनीक से जुड़े नैतिक विचार (ethical considerations) और जोखिम भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- पहला बड़ा जोखिम गोपनीयता (privacy) का है। बातचीत का निरंतर ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग उपयोगकर्ताओं की सहमति और डेटा सुरक्षा के बारे में गंभीर चिंताएँ पैदा करता है।
- दूसरा जोखिम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर अति-निर्भरता का है। यदि लोग अपने हर संवाद के लिए एआई टूल पर निर्भर होने लगें, तो संचार में मानवीय प्रामाणिकता (authenticity) और वास्तविक सहानुभूति (empathy) का ह्रास हो सकता है (Fu et al., 2023)।
भविष्य के कार्य (future work) के लिए कई दिशाएँ खुली हैं।
- सबसे पहले, शोधकर्ताओं को क्रॉस-सांस्कृतिक डेटासेट (cross-cultural datasets) विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि मॉडल को विभिन्न वैश्विक संदर्भों में निष्पक्ष और सटीक बनाया जा सके।
- दूसरा, एआई-मध्यस्थता (AI-mediated) संचार उपकरणों के निरंतर उपयोग से मानव मनोविज्ञान और सामाजिक कौशल पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तकनीक इंसानों को अक्षम बनाने के बजाय उन्हें सशक्त कर रही है।
## Conclusion
इस शोध पत्र में हमने पारस्परिक संचार और मानव-रोबोट इंटरैक्शन (HRI) में असभ्य व्यवहार का पता लगाने और उसे प्रबंधित करने की चुनौती का गहन विश्लेषण किया है। हमने स्पष्ट किया है कि केवल ध्वनिक संकेतों पर निर्भर रहने वाले पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि वे सामाजिक इंटरैक्शन के गहरे अर्थों और संदर्भों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए, हमने एक बहु-मोडल और LLM-आधारित ढांचा प्रस्तुत किया है जो न केवल असभ्यता की सटीक पहचान करता है, बल्कि संघर्ष को कम करने के लिए अनुकूली (adaptive) प्रतिक्रियाएं भी उत्पन्न करता है।
निष्कर्षतः, जैसे-जैसे समाज अधिक डिजिटलीकृत और स्वचालित होता जा रहा है, हमारी मशीनों और एआई प्रणालियों को सामाजिक रूप से बुद्धिमान (socially intelligent) होना आवश्यक है। मानव स्वभाव की जटिलताओं, विशेष रूप से असभ्य या अनुचित व्यवहार को समझने और संभालने में सक्षम प्रणालियों का विकास करना, भविष्य के सामंजस्यपूर्ण कार्यस्थलों और सामाजिक वातावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह शोध उस दिशा में एक सार्थक कदम है, जो प्रौद्योगिकी को मानवीय संवेदनाओं के अधिक करीब लाता है।
# References
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